तेरी आँखों में ये किसका इंतज़ार है
चहरे की शिकन थकावट का इज़हार है
एक नज़र देख ले इस ओर भी जानेमन
हम भी तो तेरी ख़ातिर इतने बेक़रार हैं
Saturday, 30 June 2018
रेल प्लेटफार्म पे
तवायफ़
ज़माने के तोहमतों के ही क़ाबिल हूँ मैं
एक उजाड़, बंजर, अकेली साहिल हूँ मैं
मुस्कुराने की अदा और सिक्कों की खनक से
अश्क़-ए-माज़ी छुपाने में माहिर हूँ मैं
आरज़ू नहीं दिल में न अरमाँ कोई
दस्तूर-ए-आम समझने में जाहिल हूँ मैं
हूँ खड़ी शौक़ से बाज़ार-ए-हुस्न में
नज़रों में बिकने को तुम्हारे हाज़िर हूँ मैं
ये अंधेर गलियाँ ही है अब आशियाना मेरा
न दुनिया न दिलों में ही शामिल हूँ मैं
Monday, 25 June 2018
ज़ख्म और दवा
ये कौन आया है शायर का हाल पूछने !
है ज़ाहिर जिसका जवाब वो सवाल पूछने
हमदर्दी से ज़ख्मों पर आँख फ़ेर कर
"क्या मुझे चाहने का तुम्हे है मलाल ?" पूछने
Sunday, 24 June 2018
तेरी तलाश
यादों के अंगारों में तेरी राख़ ढूंढता हूँ
तोड़ लाऊँ जहाँ लम्हे वो शाख़ ढूंढता हूँ
मैं ढूंढता हूँ तुझे हर एक चेहरे में
हर तहरीर में मैं तेरी छाप ढूंढता हूँ
धुल जाएँगे सारे ग़म किसी को पता चले बग़ैर
तू अश्क़ पहचान न पाए ऐसी बरसात ढूंढता हूँ
तेरे आसमाँ के साए से आख़िर छुपूँ मैं कबतक ?
तेरा ज़िक्र न हो जिस बात में वो बात ढूंढता हूँ
हारते थकते वो अपने यादों के परिंदे
मिल जाएँगे जिस ख़ाक में वो ख़ाक ढूंढता हूँ
चढ़ी सूली पर मेरी उल्फ़त जिस कानून के चलते
तेरी रंजिश भरी आँखों में वो इंसाफ़ ढूंढता हूँ
निकल जाए सीने से तेरा नाम लिए बग़ैर
मैं आज भी पुरज़ोर ऐसी साँस ढूंढता हूँ
फ़ना हो जाए बंदा जिस इबादत के सदक़े
मैं काफ़िर तुझमें वो मक़सद पाक़ ढूंढता हूँ
बंद है उँगलियों में तेरे जिस्म की दस्तक़
खो चुके तजर्बों में वो अहसास ढूंढता हूँ
टूट जाए कोई बादल भी मेरी सहरा के ख़ातिर
मैं हर शख़्स में मेरे लिए वो प्यास ढूंढता हूँ
सलामी
सच्ची है शख़्सियत मेरी मैं बदमिज़ाज नहीं
तुम्हारे इल्ज़ामों से मुझे कोई ऐतराज़ नहीं
झुकता है फ़लक भी बंदे के एहतराम में आजकल
ऐ ज़माने मैं तेरी सलामी का मोहताज नहीं
गवाही
ख़फ़ा करके हमेशा रुलाऊँ जिसे
कैसे इश्क़ से गवाही दिलाऊँ उसे
उसके जाने के बाद की हालत मेरी
कभी मिले ज़हेनसीब तो सुनाऊँ उसे
तलाश जब भी हो उसे बेवफाओं की
अक्स उसका ही मैं दिखाऊँ उसे
सीखा है जो मैंने राहे फ़िराक़ में
कभी आँखों में देखकर बताऊँ उसे
जब भी कोसे वो अपनी तन्हा ज़िंदगी
एक बदनसीब आशिक़ से मिलाऊँ उसे
अंजान
यूँ ही मिल गया था सफ़र में अंजान कोई
जिस पुरानी गली में है हमारी पहचान कोई
चाहत थी किसी को अपना घर बनाने की
हमारी सहूलियत का मिलता नहीं मकान कोई
Monday, 18 June 2018
बेक़रारी
जिसके लिए आँखें इतनी बेक़रार हैं
मेरी कहानी का वो भी एक किरदार है
यूँ ही नहीं तबाह हुआ मैं उसके प्यार में
वो ख़ुदा भी मेरा इसमें हिस्सेदार है
Sunday, 3 June 2018
Leap Of Faith
It Took Courage To Wishfully Walk Into Tha Cave Without Knowing The Odds Of Coming Back In Single Piece
Saturday, 2 June 2018
जनाज़ा इश्क़ का
अपनी दुनिया को बेशक़ जलाकर ख़ुश हैं
ग़म को हम गले लगाकर ख़ुश हैं
उसकी बेवफ़ाई का कलमा ख़ुदा जानता है
हम अपनी वफ़ाएँ निभाकर ख़ुश हैं
नाक़ाम इश्क़ की क्या बात करें साहब
हम उसकी मोहब्बत में ख़ुदको आज़माकर ख़ुश हैं
सौगात आँसुओं की भले वो दे गया मुझे
हम फूल खुशियों के उसपे बरसाकर खुश हैं
जो आया नहीं दोस्तों दिल की पुकार पर
हम जनाज़े में उसको बुलाकर खुश हैं
हमसे दूरी में जो चैनों सुकूँ ढूंढते थे
उसे मौत पर हम अपनी रुलाकर खुश हैं
Friday, 1 June 2018
Rope
When The Rope
Of Relation Breaks
The One Holding It
More Tightly
Gets Hurt The Most
Artist And Art
An Art Is
An Extension
Of The Artist's
Consciousness
Portraying Itself
Whisper
When Loneliness Whispers
In The Silence Of Nights
You Could See On His Face
How Hard Wholeness Strives
Lines
Some Of The
Most Relatable Lines
Are Often Expressed
By Very Depressed Souls
Self Realization
A Drop From The Eyes
Of Self Realization
Creates Ripples
Across The Lake
Of Conscience
Need
For You, You Had Me
For Me ? I Have Neither You Nor Me
Considering I Don't Exist Within Me Anymore
Wolf And The Moon
No Longer Able To Keep Up His Howling,
A Weakened And Trembling Wolf
Turned His Back On The Dazzling Moon
The Last Cry
Not Everyone Can Live With
The Blame And Guilt Of Doing
The Greater Good When It
Was Politically Incorrect.
Few Will Understand It. Fewer Will Do It.
Will
When The Muscles
Get Fatigued ,
A Man Is Driven
By His Will
Lost Star
"Aren't You Gonna Call Your Mother Today?" His Friend Said Dialing A Phone Number
"I'm Doing"
Said The Boy Gazing At The Stars
Those Humans
Someone Who Seems
Asocial To You
Might Be Having His Own
Share Of Personal Demons
To Slay
Please Understand
Path
Death Of An
Unrequited Love
Leaves A Trail Of
Several Fragments
Of A Desire
Loneliness
Surrounded By
All Sorts Of People
And Still Feel
Lonely And Weak ?
Then Yup,
You've Lost
That Person
Smiling Past
He Is Fond Of His Past
Because There
When He Smiles At Her,
She Still
Smiles Back
Despair
You Can Act Strong All Day
Thinking "If It's True?"
But In A Lonely Full Moon Night
Her Memories And Your Despair,
Overwhelms You
A Teacher
The World Is Made
A Better Place
By Those
Who Have Endured
Most Of It's Pain
Scribbles
When The Heart Cries Aloud And
Nobody's Around To Listen
Your Useless Rant,
The Notepad Acknowledges
Your Scribbling
Once
Behind Every Ruthless Jerk
There Is A Girl
He Once Cared For
Significance
She Is A Cherry Blossom Of Spring
Leaving Behind Her Scarred Winter
He Is A Wartime Hero
Scary And Not Needed In Peacetime
The Last Conversation
"You Are Too Caring And It Irritates Me Like Hell" She Said Shaking Her Head In Annoyance.
"I'm Sorry. It Won't Happen Again" He Said With A Wide Smile While A Tear Drop Grazed His Left Cheek.
That Day A Boy Learned A Lesson And A Girl Lost Her Best Friend.
Echo
Shouting Above A Cliff
At The Top Of Your Voice
And Not Hearing An Echo
That's One Sided Love
Cold Nights
"I Insist You Take My Jacket. The Night's Getting Cold Now." Says The Boy Forcing Her To Wear It.
"Be In Your Limits. You're Not My Boyfriend." She Shrugged Him Off With An Annoyed Face And Her Eyes Into His.
Her Logic Was Correct, While His Emotions Lost All Of Their Credibility.
Hospital
Hospital
A Place Where Life,
Death And Irony
All Exists At The
Same Time
Importance
The Things Which Are Most Important To You Right Now, Won't Matter In A Year Or Two. So Sit Back And Relax
Love
He Decided To Sever That Bond Not Because His Love For Her Reduced But Because He Started Loving Himself More
Death
She Is Relieving As Death And Aggravating As A Life. Your Experiences With Her Are What Your Actions Will Decide
Thread Of Relations
No Matter How Hard One Pulls The Thread , If The Other Person Isn't Even Willing To Hold It, Both Are Destined To Be Separated
Hatred
Hatred Is Something One Can't Avoid. When One Pursuits Love , Hatred Is Inevitable.
Success
Success Is Always Envied
Until Hardwork Presents Itself
Pain
You May Hate It First. But Soon You Realise It Was Pain Which Made You Meet A Similar Person, Awakened Your Better Self And Taught You Some Small Things.
Boy And Man
A Boy Knows His Rights And Wrongs
The Man Does What's Necessary
Existence
You Have The Liberty To Neglect My Existance Without Feeling Guilty. I'm Just Another Worthless Pebble In Your Invaluable Path.
Workout
When A Man Works Out, He Does If For Himself And Not For Anyone Else. No Girl Or Neighbour Is Worth The Sweat And Pain He Endures.
Drop Of Tears
Every Drop Leaving His Eyes Knew This Truth That She Doesn't Care About Him, But Was Just Pretending Until Useful.
But This Fallacy Gave Him A Reason To Wake Up Another Morning After Last Night's Presumed Death.
Ego
You Can Either Have
A Large Bank Balance
Or An Ego
तजर्बा
था तजर्बा कम और आलम इश्क़ का
है ताज्जुब महज़ आज इस बात का
बीच चीखों के टूटे दिलों के सनम
सोते कैसे हो चैन ओ सुकूँ से वहां
बेख़याली तेरी था वो तेरा पासबाँ
ग़म-ओ-खुशी में साथी किसी अश्क़ सा
छुपाना था हुनर उसका अपने हर दर्द को
रखके लबों पर मुस्कुराहट किसी कर्ज़ सा।
मौत की अघोष
समझ कर ज़हर ही पिला दे
तेरी आँखों मे जो जाम है
मौत की अघोष में भी नहीं वो
तेरी बाहों में जो आराम है
वफादार
बेवफ़ा के दिल मे ख़ुदका कभी इंतज़ार नहीं देखा
इस क़दर जिंदगी को मौत के लिए बेकरार नहीं देखा
टूटे दिलों की मरहम अए बदनाम तवायफ़ तू
इन आँखों ने तुझसा कोई वफ़ादार नहीं देखा
साहिल
एक साहिल बेनिशान तू
मैं एक फ़िज़ा बेलगाम हूँ
तबाह कर दूँ उम्र सारी
वो मेरे मैकदे की शाम तू
तलाश हर प्यासे आशिक़ को
वो सहरा का मक़ाम तू
जूझता रहे आदम नादानी में
बस एक ख़्वाब वो जवान तू
समझे दर्द नाकाम इश्क़ का
एक रात वो वीरान तू
बेज़ार इश्क़
बेज़ार इश्क़ की बेबसी तू
शबाब वो दिलनशीं तू
मौत को गिला ख़ुदा से
मौत से भी हसीं तू
जगाए रात सारी आँखों को
ज़िंदगी की वो बेकसी तू
वजूद का हिस्सा मेरे
मेरी लकीरों में बसी तू
ग़ज़ल का अल्फ़ाज़ मेरे
मेरे कलम की मसी तू
अरमान
टूटे अरमानों की एक मशहूर कहानी है
वो मूरत इश्क़ की वफ़ा की निशानी है
रहा न छुपाने को अब और कुछ उससे
किस्सा उसका मेरे अश्कों की ज़ुबानी है
हसीं सदा
इस क़दर ख़ुदको झील में निहारा न कर
तेरी हसीं सदा से इश्क़ को पुकारा न कर
पा ले दिलकश हुस्न घर के आईने में तू
बेवजह चांद को फ़लक पे बुलाया न कर
होंठ रसीले
आँखें नशीली किसी बहते शराब सी
होठ रसीले जैसे कली हो ग़ुलाब की
तेरे रुख़सार ने संजोए हैं राज़ बहोत खूब
है पहेली तू आला दर्जा बंद क़िताब सी
तक़दीर
हमारी तक़दीर के सवालों का रुख मैं मोड़ दूँ
ज़िंदा रहने की बिना तेरे सारी उम्मीदें छोड़ दूँ
न जाए रुस्वा होकर कभी तू कब्र से मेरी
जुदाई में तेरे आँचल का यूँ कफ़न मैं ओढ़ लूँ
अफ़वाह
तेरा हर आशिक़ अपनी जवानी तेरे नाम कर गया
जिसे देखा दोबारा मुड़कर वो बस ख़ुशी से मर गया
अफ़वाह थी ज़माने में कि तुझे मुझसे मोहब्बत है
तेरा हाँ में हर झुकाना मुझे बदनाम कर गया
अश्के उल्फत
है बस ये तमन्ना यही आरज़ू मेरी साँसो में
की तू लग जा गले से समा जा मेरी बाहों में
हर क़तरा बहा दूं लहू का मैं तेरे सजदे को
मेरी ख़ातिर जो बहें अश्क़-ए-उल्फत तेरी आँखों से
रिश्ता
तेरा मेरा ये रिश्ता ये यरियाँ हमारी
कभी उतरे न सर से ये प्यारी सी ख़ुमारी
जो लम्हात तेरी गुज़रें ग़म में अश्क़ बहाकर
मैं जी लू तेरे हिस्से की ज़िंदगी सारी
बेबसी
थक गया हूँ बेबसी का इज़हार करते करते,
मै फिरसे रो पड़ा हु तेरी यादों को याद करते करते,
तुझे खबर हो या न हो ऐ इशरत लेकिन,
हो गयी है नफरत मुझे खुदसे...तुझसे प्यार करते करते।
मन्नत
बरसों से इंतज़ार जिसका तू वो मन्नत पुरानी
ख़ुदा की दिलकश रहमत है ये तेरी नादानी
बेजा हैं सारी रुकावट और ज़माने की बंदिशें
पार वक़्त के भी चलेगी ये तेरी मेरी कहानी
शबनम
सुबह की शबनम सी तू
मैं तिनका इंतज़ार में बैठा
एक चहक पखेरू की तू
मैं मस्त शाख़ भीगा भीगा
ख़ुदा से रंजिश सी तू
मैं शैदाई बहका बहका
मेरी प्याली शराब की है तू
मैं घुलता तुझमें रफ़्ता रफ़्ता
मेरी रूह का साहिल तू
मैं मनमौजी बहता रहता
झील
आँखें हसीन हैं तेरी ख़ामोश किसी झील सी
तुझमें डूबता मैं रहूँ तू बहे मुझमें किसी नीर सी
नहीं होता तेरी अदाओं का क़ायल मैं इतना लेकिन
तेरी सुलगती नज़र मेरे दिल में चुभी किसी तीर सी
करवटें
तकिया सिरहाने रखकर तेरे ख़्वाबों में खो जाऊँ
बदलूँ करवटें रह रहकर तेरी ज़ुल्फों को सहलाऊँ
फ़रियाद है मेरी अगर ख़ुदा से तो इतनी हमनशीं
तू मुझमें समा जाए मैं तेरे दिल मे उतर जाऊँ
मिजाज़
भाया मुझे तेरा मिजाज़ दोस्ताना
सच को मेरे फ़क़त तूने पहचाना
मिले न तुझसे भले कुछ और
चाहूँ मैं तुझसे तेरी यारी का नज़राना
वफ़ा की राह
था दिल मेरा हमेशा तेरी पनाह में
हूँ खड़ा अकेला मेरी वफ़ा की राह में
मिलता नहीं हूँ अब मैं तुझमें कहीं भी
जब भी मैं ख़ुदको ढूंडू तेरी निगाह में
पीर
मेरी आँखों से लुढ़क कर अश्क़ तेरे दिल मे उतर जाए
मेरी सिसकती पीर तेरी आहों में बिखर जाए
नहीं था नसीब में कभी जो तेरी बाहों का सुकूँ
है उम्मीद वो आराम मुझे मेरी मौत दे जाए
ख़ुश्क आँखें
मेरी ख़ुश्क आँखों में तेरे प्यार का इंतज़ार है
तुझे भुलाने की मेरी सारी कोशिशें बेकार है
मेरी नज़रों भी अब ख़ुदको मैं देख सकूँ
ख़ुदा ने बक्शा मुझको न जाने कैसा ये प्यार है
बेशुमार
तेरे शहर में तेरे आशिक़ को शुमार कर दे
आज हर दिल में प्यार तू मेरे यार भर दे
है गुज़ारिश मेरी तुझसे एक और दिलबर
तेरे जहाँ मे तू हर ख़ुशी बेशुमार भर दे
श्याम
ऐसा रमा मैं तेरे श्याम रंग में
बीते दिन बीती रात बस तेरे संग में
करूँ शिकायत तेरी अब और किससे
तेरी बातें तेरी अदा करें मुझे तंग रे
बिखरे पन्ने
मेरे दिल में उसके नाम की जो बुझी सी आग है
पुराने किस्सों के बिखरे पन्नों की भूली सी बात है
जिसे छू कर जलूँ और दूर रहकर तड़पूँ
ऐसी शोख़ वो ज़ालिम मेरी प्यारी सी राख है
क़ाबिलियत
तुझमे खोकर ही मैंने ख़ुदको पाया है
तू मेरी क़ाबिलियात का नायाब साया है
तू मिली तो मिला मेरे अल्फाज़ो को मायना
तेरा अक्स मेरी बिखरती रूह में समाया है
मग़रूर
उसकी एक तस्वीर ने मुझे यूँ मजबूर किया है
भूरे रंग को जो आज इतना मग़रूर किया है
लिखता हूँ एक कलाम आज उस शख़्स को
इस नाचीज़ को जिसने इतना मशहूर किया है
फक्र
फ़क्र है वक़्त को मेरे सनम तुझमे तबाह होना
देख नादानी में तेरा बिगड़ कर सुर्ख सा होना
पीर समझे सारी मेरी बिन कहे मेरे हमदम
आँखें मेरी हों इशरत लबों का तेरे खिलौना
तारीख़े
भूल जाऊँ जो तारीखें तो लम्हें याद रखता हूँ
तुझसे मिलने की चाहत को सदा आबाद रखता हूँ
तैरता शौक़ से हूँ मैं उल्फ़त के समंदर में
नौबत में डूबने की तुझसा किनारा साथ रखता हूँ
फिक्र
फिकर मेरी नहीं तो ज़माने की सही
सितम शबाब का हमपर न ढाओ यूँही
क़ायल आँखें मेरी तेरी सूरत की इतनी
कलम भी अब मेरी बस ख़ामोश हो गयी
अख़्तियार
मेरी मोहब्बत में ख़ुदको मशहूर होने दे
यूँ ख़ुदपर से अख़्तियार बा सुरूर खोने दे
राज़ि है दिल मेरा हर सज़ा के लिए
तुझे चाहने का मुझसे कुसूर होने दे
मेरी हर साँस में गूंजे बस नाम तेरा
अरदास ये ख़ुदाया मेरी मंज़ूर होने दे
कुछ देर ठहर कर निहार ले ख़ुदको
तेरी सोहबत का मुझको ग़ुरूर होने दे
निकलेगी शायरी मेरे हर हिस्से से
तेरे इश्क़ ने दिए ज़ख्म को नासूर होने दे
नख़रे
न कर नादाँ तू इतने नखरे
हैं पारसा यहाँ मेरे भी कितने
मेरा साथ तेरी खुशकिस्मती होती
तेरी ज़रूरत नहीं वजूद को मेरे
गहरा ज़ख्म
हो तेरी आँखों में भी कभी तलाश मेरी
बसी ज़हन में जैसे ज़ख्म तू गहरी
इंतज़ार मुझे है सनम उस रोज़ का
मेरे ग़म में भी भीगे कभी आँखें तेरी
सुनती है जो शोर सारी क़ायनात का
फ़कत चीखों पे मेरी वो खो जाती कहीं
मेल अपना नहीं है कोई मेरी सदीक
बिखरे आसमाँ सा मैं तू चिड़िया शहरी
जन्नत की हूरें
जमीं पर देख कर तुझको
खफा हैं जन्नत की हूरें भी
फ़रिश्ते भी बोल पड़े सादिक
हमें इंसान बनना है
तेरी ज़ुल्फ़ों से जो टकराएं
मुसलसल फिजाएं चंचल सी
क़ासिद-ए-खुदा ने भेजा वो
मुक़म्मल पैग़ाम बनना है
साक़ी को गुमाँ है ये
हयात है वो शान-ए-मैकदे की
तेरा मेहताब-ए-रुख चूमे जो
वो छलकता जाम बनना है
सज़ा-ए-इश्क़ देने की
बादस्तूर है ये रिवायत जो तेरी
लगे जो सादिए आशना को तेरे
वो हसीं इलज़ाम बनना है
ख़फ़ा है मेरा खुदा मुझसे
भूल बैठा हूँ उसे मोहब्बत में तेरी
उससे बग़ावत अगर बेईमानी है
कस्म-ए-ईमाँ मुझे बेईमाँ बनना है
इनायत
तू इनायत ख़ुदा की
शाम के बाद सहर है
ज़मीं पर बरतता
एक खूबसूरत क़हर है
तू इश्क़-ए-याज़दानी
दोसती की मेहर है
लहू को चीर दे
वो क़ातिलाना नज़र है
तू अमृत अली की
हर का ज़हर है
बहा ले ग़मों को
वो मौसिक़ी की लहर है
लब
इश्क़ तेरा मेरा प्यारे
कुछ इतना रूहानी हो
मेरे हर दर्द का साथी
तेरी आँखों का पानी हो
लिख दे इशिका से
मेरा मुक़द्दर खुदा ऐसे
तेरे हर जिस्म के हिस्से पर
मेरे लबों की निशानी हो
नींद और चैन
तू मेरी न होकर भी तुझे खोने का डर क्यों है
तेरे न होने का मेरे वजूद पर इतना असर क्यों है
नहीं सहा जाता जुदाई में मोहब्बत का गुमाँ
नींद गयी चैन गया जान जाने की ये कसर क्यों है
शरारत
गाज गिरती है दिल पर
धड़कनें रूठ जाती हैं
जब कभी हया की पनाहों में
शरारत खिलखिलाती है
निगाहे हवस
छू गयी जो निगाह-ए-हवस तेरे बदन को कभी,
तड़प उठा मेरे गुमाँ का हर एक हिस्सा था;
पलट कर देखा जो तूने उन शोहदों की तरफ,
तेरी आँखों में मैंने खुदका अक्स देखा था
इज़हारे मोहब्बत
संभल रहे हैं जज़्बात मेरे हर बार गिरते गिरते,
मरना चाहता हूँ फिर मैं तेरे साथ जीते जीते,
न कर देरी इज़हार-ए-मोहब्बत में ऐ बहार-ए-सीरत,
कहीं मैं मर न जाऊँ तेरा इंतज़ार करते करते
ज़ख्म
बहुत लंबी है ज़िन्दगी ऐ दोस्त,
कभी न कभी तुम भी ठोकर खाओगे,
समझोगे हमारे ज़ख्मों की गहराइयों को
जब ख़ुदको उन्हीं से घिरा पाओगे
कुमुदनि
जैसे शाम कुमुदनि को चूम कर निकले कोई शबनम,
जैसे धुप की आहो में हो कोई गा रहा सरगम,
उस अर्क की किस्मत से ऐसा हसद हु मै व्यूना,
के तेरे संजीदा चेहरे को देखकर भूला मैं सारे ग़म
सावन
तेरी यारी के लिए मै अपने प्यार को मार दूँ,
खुदको बिगाड़ कर मै तुझको सवार दूँ,
भूले न कभी भूल कर भी ज़िन्दगी में,
इस माह-ए-सावन में तुझे ऐसा मै उपहार दूँ
अफ़साना
वो आशिक़ ही क्या जो दीवाना न कहलाये
वो आशिक़ी ही क्या जो ज़माने की तोहमतें न पाए
आशिक़ी तो बुलंदी तब छूती है व्यूना
जब दास्ताँ-ए-मोहब्बत अफ़साना बन जाए
सफ़ीना
दो दिन की है ज़िन्दगी सदा खुश रहना,
दिल में हो कोई ग़म तो हमसे कहना,
आएँ कितने ही तूफान इस दरिया-ए-ज़िन्दगी में ऐ दोस्त,
बस सफीना-ए-रेहमत की तरह सदा बहते रहना।
ईमान
ईमान तू इब्राहिम का
इस्माइल की क़ुर्बानी है
नेमत है तू अल्लाह की
इबलिस की नाफ़रमानी है
आशिक़ तू है राधा सी
मेरी यार तू रहमानी है
न फना कर सके वक़्त जिसे
एक ऐसी प्रेम कहानी है
सफ़र
मेरे ख़यालों में ही सही
काफ़ी है तेरा रहना
सर्द बेरहम रातों में
हरारत है तेरी बाहों का गहना
रेल और सफर सा ये साथ अपना
गवारा नहीं रूह को रूह से जुदाई सहना
वफ़ा की भीख
मोहब्बत चीज़ ऐसी है ख़ुदाया जान लेती है
सच्ची नफ़रत ही आशिक़ को वजह जीने की देती है
वफ़ा की बूंद मांगता जब दीवाना मोहतरम से
उसकी झील सी आँखों मे पानी की ग़रीबी है
वीराँ सी सड़क पर किन्हीं तन्हा सी रातों में
अब उसकी सुर्ख सी आँखों मे थोड़ी नमी सी है
न देखें दोबारा उसको जिसने फ़ेरी नज़र हमसे
बाकी ग़ैरत इतनी हम में ताज्जुब अभी भी है
ख़यालों से जो उतरोगे असलियत के समंदर में
प्यारे तुम भी ये जानोगे लोग कितने फ़रेबी हैं
गिरेगी जब तुम पर भी हालातों की दामिनी
गिन पाओगे उनको जो आज तुमसे क़रीबी हैं
इश्क़ की गालियाँ
इन आँखों ने देखें हैं हसीं चेहरे बहोत
पहोच इश्क़ की गलियों में हैं गेहरे बहोत
जवानी ख़ाक की दीवाने ने इसी मोहल्ले में
दिल के दर पर हैं इसके दर्द के पेहरे बहोत
ग़ुरूर
तेरे रुख पे सजा ये जो ग़ुरूर है
मेरे जुनूँ बिना सब फ़िज़ूल है
तोड़ हद मैं सब बेहद हो जाऊँ
तेरे इश्क़ का छाया ऐसा फ़ितूर है
ख्वाहिशें
बयाँ करते हैं अश्क़ मेरे तुझसे मिलने की ख़्वाहिशें
याद तेरी जो आती है मैं शह ख्वाबों की लेता हूँ
दिन गुज़रता है रह रहकर रात किश्तों में कटती है
अकेलापन मेरे रहबर मैं तुझसे बाँट लेता हूँ
रश्क़ क्यों है ज़माने को तेरे मेरे इस रिश्ते से
पाकीज़ा से इस बंधन को मैं वफ़ा का नाम देता हूँ
पूछा जब ज़माने ने ज़ख्मों का सबब मेरे
पत्थर दिल पर रखकर मैं तेरा ही नाम लेता हूँ
शाम
ये ढलती शाम मुझको देख ऐसे मुस्कुराती है
जैसे हर शब तू मेरे ख़्वाबो ज़हन में आती है
लेकर तेरी धड़कनों से मेरी साँसों का साज़
इश्क़ का राग मेरी मोहब्बत गुनगुनाती है
न पैमाने की न गरज शराब की मुझको
मेरी साक़ी मुझे आँखों से पिलाती है
तन्हाई में बैठे सोचूँ जब मैं तेरे बारे में
लगता है जैसे फिजाएँ तेरा पैग़ाम लाती हैं
शिक़ायत एक तुझसे है मेरी ओ मेरे हमदम
ये जुदाई तुझसे मेरी आँखों को रुलाती है
हाजी नहीं मैं न ही कोई हूँ नवाज़ी लेकिन
तुझसे मुलाक़ात मुझे मेरे मौला से मिलाती है
नाज़नि
यारों की क्या तु ग़ैरों पे भी नाज़नि
होने से तेरे न रही हयाते कोई कमी
तेरी सीरत मेरी ख़ूबसूरत ग़ज़ल सी
तुझे चाहना मेरा था बस यूँ ही लाज़मी
बरसी थीं मेरी आँखें भी हर उस दफा
तेरी आँखों मे आई थी जब्भी नमी
यकीं टूटे कभी न तेरा मुझपर सदीक
मुख़्तलिफ़ हो जहाँ मेरा फ़लक या ज़मीं
ऐब होता सभी में है तुझमे भी लेकिन
इश्क़ में है रज़ा ओ मेरी हमनशीं
तेरी उल्फत में ख़ुदको तराशा सदा
पाशेमा इसका मुझको न होगा कभी
वक़्त कर दे जुदा हमें गर एक दूसरे से
परे वक़्तों हालात हम फ़िर मिलेंगे वहीं
शौक़ीन
आँखें तेरी कत्थे सी, शौक़ीन ठहरा मैं पान का
लाली सहर की तू, तू ही सबब शाम के ग़म का
रुस्वा किया जाज़िब साक़ी को भी इस बात ने
रफ्ता रफ्ता शराब बन रहा मैं तेरे जाम का
पखेरू
खुशबू में वफ़ा की तेरी महक जाता हूँ मैं
सुन आहेटें तेरी पखेरू सा चहक जाता हूं मैं
जाने पहचाने से तेरे दिल के शहर में
अपनी बनाई राह से भटक जाता हूं मैं
ग़मगीन रुख देख तेरा सिसक जाता हूं मैं
बालियों की बोली में तेरे खनक पता हूँ मैं
हंसते बचपने के तेरे मासूम से नशे में
एक नौशिखिये शराबी सा बहक जाता हूं मैं
वफ़ा
हुआ करती थी कभी वफ़ा भी उसकी सांसो में
चाहत वस्ल-ओ-उन्स की थी मेरी भी आंखों में
जलाई रात सारि दीवाने ने अरमानो की चिता
बहक कर एक हसीना की मीठी सी बातो में
तोहफ़ा
भली सूरत मेरी ख़ुदा का तोहफ़ा है मुझको
मुझे चाहना तुम्हारा मेरी ख़ता तो नहीं
न डालो बुरी नज़र यूँ बदन पर मेरे
शहवत है तुम्हारी ये कोई मोहब्बत है नहीं
दिल तोड़ना ख़ुदाया मेरा शौक़ नहीं है
कुछ ख़्वाहिशें हैं मेरी मैं बेरहम हूँ नहीं
प्यार न सही हमराह बनकर रहो मेरे
हर रिश्ते का हो नाम ये ज़रूरी तो नहीं
आशना
फ़कत ये सोच कर तुझसे
मोहब्बत की सनम हमनें
मेरा तो कोई नहीं लेकिन
खरा आशना हो तेरा जगमें
पाकर एहले वफ़ा तुझसा
मुझको लगने लगा है ये
जहाँ के ऐबो रंजिश में
ख़ुदा को पा लिया तुझमें
आमिल
शिकस्तगी के आलम में था तू ही मेरा आमिल
किया ज़िन्दगी में अपनी तूने मुझको शामिल
बेआबरू हुए कितनी दफा नज़रों में अपनी ही
इस आस में की कर सकूँ तेरा प्यार मैं हासिल
केहती हूँ ये होकर मैं मेरे अश्कों से आदिल
रहबर तू,तुहि मेरे इश्क़ की राह का राहिल
खुद को पाने के सफर में ये पाया है मैंने
तू था ही नहीं कभी मेरे प्यार के क़ाबिल
शर्मो हया
देखूँ तुझको लगा के टकटकी मैं बार बार
घायल करता है तेरा शर्म से करना आँखें चार
मुक़म्मल करे जो शबो क़ुदरत का आगाज़
आवाज़ तेरी है जैसे किसी पायल की झनकार
चाहूँ करना तुझसे मैं मोहब्बत बेशुमार
बरसों से रहा हूँ मैं बस तेरा तलबगार
यूँ तो होंगे बहुत तेरी तमन्ना करने वाले
ज़र्रा ज़र्रा है मेरा तेरी नज़रे करम का कर्ज़दार
गालों की नरमी करती गुलों को शर्मसार
तेरी भौंहे हैं तेरे हया की पहरेदार
छाँव पाने को तेरी गेसुओं की ओ सनम
नीलाम कर दें दीवाने खुदको सरे बाज़ार
ख़्वाब
ख्वाबों में सजाई मूरत है तुझसी हूबहू
तिश्नगी आँखों की तू मेरे दिल की आरज़ू
बातें की कितनी तेरी यादों से मैंने
कह कुछ न पाया कभी तेरे रूबरू
रंज
होगी देखी ज़माने ने खूबसूरती बड़ी तेरी
मैं उस रंज से वाकिफ़ हुँ जो तेरी आँखों में बसता है
तारीफ़ करें चाहे जितनी लोग तेरे जिस्मो शबाब की
मैं तो उस रूह का क़ायल हुँ जो हर ग़म में हँसता है
बहक जाता गुनाहों की उन अंधेरी सी गलियों में
ये तेरी नेकी का नूर है जो मुझे नाबाद रखता है
हैसियत क्या शायर की जो लिख सके तेरे बारे में
बस तेरी नवाज़िशें हैं जो कलम आबाद रखता है
शराब और शबाब
अज़ल ताल्लुक है कोई शराब और शबाब में
दोनो नशीली हो जाती हैं वक़्त के बहाव में
क़रीब
इस जहाँ में मेरा कोई न तुझसा क़रीब
मेरे फन की मसि तू ही मेरी हबीब
जान जाती रहे बर्क़ मुझपर गिरे
ढूंढ लाए अगर कोई मुझसा रक़ीब
कुंदन
दूर से आई कहीं से परियों के तू गाँव से
बर्फ सा चमकता चेहरा बदन कुंदन की छाँव से
मोतियों सी आँखें लब तेरे शहद से हैं
देखूँ तुझे मुसलसल मैं इश्क़ के किसी घाव से
गेसुओं की सरसराहट ने राज़ कितने है समेटे
छूने की चाहत मुझे है खेलना चाहता हूँ तुझसे
ललक जिस्म की तेरे आँख और मेरी रूह में है
देख तराशे बदन को तेरे खो न बैठु काबू मैं खुदपे
राजपूत
बेबाक़ तू बेख़ौफ़ भी
चंचलता है मौज भी
शान है मारवाड़ो का
राजपूतों का तू रौब भी
जानी पहचानी प्यारी सी
दुनिया से तू न्यारी भी
नज़र आसमां और पाँव ज़मीं पर
जहाँ जीतने की तैयारी भी
वजूद
भूल बैठे वजूद खो गया है मकाम
तेरी सादगी पे हम यूँ फना हो गए
मटकती तेरी वो बहकती सी आँखें
उनकी आवारगी पे हम तो फ़िदा हो गए
ज़हर पाकर तेरी क़ातिलाना नज़र का
प्याला अमृत का हम तो मना कर गए
जादू ऐसा है तेरा ओ मुझपर सदीक
तुम मुझको बेहतर एक शायर बनाकर गए
धड़कनें
तड़पाना चाहती हूँ तुझे के मज़ा आएगा मुझे भी
सुन लेती हूँ धड़कने तेरी जो हो तू कहीं भी कभी भी
नहीं फर्क पड़ता तेरे जाने से ये जताती हु सबको
के उसी इश्क़ की आग में जले तू भी और मैं भी