Friday, 1 June 2018

अख़्तियार

मेरी मोहब्बत में ख़ुदको मशहूर होने दे
यूँ ख़ुदपर से अख़्तियार बा सुरूर खोने दे

राज़ि है दिल मेरा हर सज़ा के लिए
तुझे चाहने का मुझसे कुसूर होने दे

मेरी हर साँस में गूंजे बस नाम तेरा
अरदास ये ख़ुदाया मेरी मंज़ूर होने दे

कुछ देर ठहर कर निहार ले ख़ुदको
तेरी सोहबत का मुझको ग़ुरूर होने दे

निकलेगी शायरी मेरे हर हिस्से से
तेरे इश्क़ ने दिए ज़ख्म को नासूर होने दे

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