तू मेरी न होकर भी तुझे खोने का डर क्यों है तेरे न होने का मेरे वजूद पर इतना असर क्यों है नहीं सहा जाता जुदाई में मोहब्बत का गुमाँ नींद गयी चैन गया जान जाने की ये कसर क्यों है
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