मेरे दिल में उसके नाम की जो बुझी सी आग है पुराने किस्सों के बिखरे पन्नों की भूली सी बात है जिसे छू कर जलूँ और दूर रहकर तड़पूँ ऐसी शोख़ वो ज़ालिम मेरी प्यारी सी राख है
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