सुबह की शबनम सी तू मैं तिनका इंतज़ार में बैठा
एक चहक पखेरू की तू मैं मस्त शाख़ भीगा भीगा
ख़ुदा से रंजिश सी तू मैं शैदाई बहका बहका
मेरी प्याली शराब की है तू मैं घुलता तुझमें रफ़्ता रफ़्ता
मेरी रूह का साहिल तू मैं मनमौजी बहता रहता
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