होगी देखी ज़माने ने खूबसूरती बड़ी तेरी
मैं उस रंज से वाकिफ़ हुँ जो तेरी आँखों में बसता है
तारीफ़ करें चाहे जितनी लोग तेरे जिस्मो शबाब की
मैं तो उस रूह का क़ायल हुँ जो हर ग़म में हँसता है
बहक जाता गुनाहों की उन अंधेरी सी गलियों में
ये तेरी नेकी का नूर है जो मुझे नाबाद रखता है
हैसियत क्या शायर की जो लिख सके तेरे बारे में
बस तेरी नवाज़िशें हैं जो कलम आबाद रखता है
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