खुशबू में वफ़ा की तेरी महक जाता हूँ मैं
सुन आहेटें तेरी पखेरू सा चहक जाता हूं मैं
जाने पहचाने से तेरे दिल के शहर में
अपनी बनाई राह से भटक जाता हूं मैं
ग़मगीन रुख देख तेरा सिसक जाता हूं मैं
बालियों की बोली में तेरे खनक पता हूँ मैं
हंसते बचपने के तेरे मासूम से नशे में
एक नौशिखिये शराबी सा बहक जाता हूं मैं
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