एक साहिल बेनिशान तू मैं एक फ़िज़ा बेलगाम हूँ
तबाह कर दूँ उम्र सारी वो मेरे मैकदे की शाम तू
तलाश हर प्यासे आशिक़ को वो सहरा का मक़ाम तू
जूझता रहे आदम नादानी में बस एक ख़्वाब वो जवान तू
समझे दर्द नाकाम इश्क़ का एक रात वो वीरान तू
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