सच्ची मोहब्बत को ज़िंदगी आज़माती है
हर मोड़ पर, हर दौर में क़िस्मत सताती है
समझ सको उसकी चुप्पी में छुपा शोर तुम
बेचैनी में अगर उसको रात लम्हें जगाती है
उसके होठों को छू कर ज़ुल्फ़ों में हाथ फेरो
तुम्हारी गोद में सर रखकर जो सबकुछ भूल जाती है
ख़्वाहिश तुम्हारी हो अगर बारिश को चूमने की
वो ख़ुदको भूलकर भीगने तुम्हारे साथ आती है
अपनी झुकी निगाहों से सदा सजदा करो उसका
तुम्हारे पाँव की मिट्टी वो अगर माथे सजाती है
अश्कों से सींचो वफ़ा के दरख़्त को तुम
हालातों के थपेड़ों में ये शाख़ें अक्सर टूट जाती हैं