Thursday, 31 May 2018

True Self

The One You Encounter
In The Darkest Alley Of Your Thoughts,
Yeah, That's Your True Self.
Confront It

Haunting Past

Make Peace With Your Past
Or It Will Keep
Haunting Your Present
And Scare Away
Your Beautiful Future

Who I Am

I'm Loved By Few,
Hated By Some And
Feared By The Rest

Those Days...

To Know The Hustle And Typical Chore
To Know The Depth And Shallowness Of The Shore
He Could Read The Pain In Her Eyes
A Blank Look At Her Face Was Suffice

Vocal And Sincerity Were The Things To Adore
He Went Through The Heart And Touched Her Soul
Don't Fall For Skin And Innocent Eyes
For You That's A Wiseman's Advice

Qualification

Neither Any Degree In Literature
Nor The Intuition That Sets In
It's The Emotional Turmoil
That Brings Out The Artist Within

Inseparable Yet Humans

Afraid Of Losing You In This Chaotic Lair
Trying To Balance My Affection And Fear
Convincing Myself That You Won't Go Anywhere
Expecting The Almighty To Be Just And Fair

With My Nurturing Love Year After Year
Pouring You Withing Myself, My Dear
Admiring Your Compassion,Your Diligence, Your Care
Slumbering Peacefully Under Your Pleasant Glare

Shedding Aside A Drop Of Tear
With You My Pearl, My Intentions Are Clear
May Present Myself If The Devil Shall Dare
Trying To Separate Our Enduring Pair

The Deserted One

I'm Everything You Are Not
A Possessor Of Guts, Enduring For A Cause
I'm Everything You Claim I'm
A Loser, A Pervert, A Cheap Mayhem

Cherishing A Character Considerably Gross
Your Desire To Win, Your Despair To Loss
Those Who Know Me, Know My Game
A Timid Liability, A Beast Untamed

Saying Aloud The Necessary Clause
Disappointing Sometimes The All Time Boss
Molded By The Eternal Flame
After Facing Myself, I Couldn't Remain The Same

Casualty Ward At 6 P.M.

On The Tranquility Of Our Days
In A Hospital's Casualty Ward
A Young Man Was Rushed In
With An Accident And A Given Up Heart

"It's A Lost Cause" Said A Senior
Lots Of Blood Is Already Lost
Hell Bent Was The Intern To Try
No Matter How Much The Cost

Watery Eyes And Mumbling Lips
That's All The Family Had To Pray
To Think In Their Weakening Mind
If Their Gods Have Left Them Stray

He Recalled The Hippocratic Oath
And Driven By His Will To Strive
At Stake Were His Hard Earned Skills
So Perhaps Life's Flame May Thrive

A Painful Thing For A Passing Mind
To Watch His Efforts Go In Vain
Bright Apron And A Delicate Conscience
Were Tainted In A Life Long Stain

The Man Left The Mortal Realm
Despite All That The Medic Tried
That Day My Friends In That Ward
A Young, Enthusiastic Doctor Cried

When God Met Me

I Couldn't Understand You Earlier
Now I No Longer Care
Making Everything Tough For Me
For Me, You Were Always Unfair

But Now I Am  Getting The Way You Work
I Was Shattered And Left Broke
I'm Thankful For The Pain I Received
You Painted Me With The Best Of Your Stroke

क़सम

दिल के बिखरे हुए हिस्सों की क़सम
टूटे हुए उन पाक़ीज़ा रिश्तों की क़सम
अश्क़ बेचकर ख़रीदी है शोहरत मैंनें
महबूब न तो उसके किस्सों की क़सम

जिस्म

तेरी साँसों को मेरी साँसों में पिघल जाने दे
मेरे लबों को तेरे जिस्म पर फ़िसल जाने दे

कुतरते हुए नर्म तेरे गालों को
तेरे सीने में दबी आह को निकल जाने दे

सलीके से खेलकर तेरी ज़ुल्फों से
मेरे शोख़ मासूम इरादों को मचल जाने दे

नाभी पर बर्फ़ रखकर जहाँ चूमकर ठहरूँ
तेरी कमर को सर्द शिद्दत से थिरक जाने दे

मेरी मोहब्बत में तेरी तड़प की आग से
तेरे मोम से बदन को पिघल जाने दे

मदहोश कर दे तेरी रूह को सरसराहट से
यूँ मुझको तेरी रूह में उतर जाने दे

कुंदन से तेरे बदन की नायाब बनावट को
मेरे वस्ल की तपिश में निखर जाने दे

नज़ारे

इन आँखों ने देखें हैं नज़ारे वो
जो अछूते हैं धूप की नज़र से भी

हवस करती है बिखरते से इशारे वो
लहू दौड़ता है रगों की फ़ज़ल से भी

तपिश बढ़ाती हैं तेरी टूटती कराहें वो
मदहोश करता है तेरा दर्द से सिसकना भी

हर वीराना चीरती हैं तेरी आवाज़े वो
लुत्फ़ देता है तेरा रंज से सिमटना भी

बदन

तेरे बदन की लकीरों में अपनी हथेली को ढूंढते हैं
बात वस्ल की आ जाये तो खुदा-ओ-जहाँ को भूलते हैं
होती है मेरे दिल मे कसक तेरे बदन की कुछ ऐसी
ख्वाबों में गीले से तेरे शबाब को चूमते हैं

Tuesday, 29 May 2018

ज़ालिम

यूँ इतरा न ज़ालिम तू अपने हुस्नो शबाब पर
मेरे लफ़्ज़ों की नेमत ने तुझको मौला बना दिया

हार बैठे थे दिल अपना उसके मासूम नक़ाब पर
मौका पाते ही बेईमा ने असल रंग दिखा दिया

रखा था छुपाकर उसको ग़ज़ल की क़िताब में
नादानी में नादाँ नें अपना ही घर जला दिया

लिखी कहानी अपनी तितली के परवाज़ पर
नाज़ुक से दिल को मेरे उसने बेजा ही रुला दिया

ओ ख़ुदा मोहब्बत के मेरा कुछ तो हिसाब कर
उसने बरसों के रिश्ते को एक पल में मिटा दिया

कहानी

मेरे दिल में हुई जगह ख़ाली न भर सका
मैं तुझसे किये वादों से बेईमानी न कर सका
तू सुनाए बरसों तक अपनी सहेलियों को
मैं चाह कर भी ऐसी कहानी न बन सका

नादान

तुझे याद किये बग़ैर तुझे भुलाऊँ तो कैसे
इस भीड़ में अपनी तन्हाई को छुपाऊँ तो कैसे
'वो सब वहम था मेरा' ये सच तो है लेकिन
नादान दिल को मेरे ये बात समझाऊँ तो कैसे

दोज़ख़ की आग

दोज़ख़ की आग में ख़ुदको जलाया है मैंने
हुनर आज़माइश में सबकुछ गवाया है मैने
दोस्त मायूस पर दुश्मन क़ायल हैं मेरे
बड़ी दुश्वारी से ऐसा अंदाज़ कमाया है मैने

शिक़ायत

उसकी शिक़ायत है कि मैं हद से गुज़र गया
कैसे कहूँ की मैं इश्क़ में उसके बिगड़ गया

जले जब धूप में तलवे तो मैंने ये सोचा
जिसका साया था मुझपर वो दोस्त किधर गया !

पूछा जब मौत नें मेरा पता उससे
बेझिझक कहा उसने की "वो उधर गया"

माँगे जब ख़ुदा से वो पुराने लम्हें मैंने
उसकी ओर देखकर वो मुझसे मुकर गया

एक अरसा हुआ दोस्तों उसकी सूरत देखे
कोई यहाँ था जो अब मुझसे बिछड़ गया

गुस्ताखियाँ

मेरी गुस्ताखियों का इस तरह जवाब दिया उसने
बाहों में भर कर होंठों से दबा दिया उसने
ज़ाहिर न कर सके जिस्म वस्ल के राज़ कोई
इस क़दर मुझे ख़ुदमें छिपा लिया उसने

राहिल

मासूम सा हमारे साथ है राहिल कहीं
भीड़ में फरेबों के जो शामिल नहीं
अपने दीवाने का कुछ तो ख़याल कर
जलवे झेलने के हम तेरे काबिल नहीं

कुसूर

मोहब्बत है तुझसे ये मेरा कुसूर है
नया कुछ भी नहीं ये पुराना दस्तूर है
देखती हैं नज़रें रोज़ छुपकर जिसे
उसमें यार कुछ बात तो ज़रूर है

दास्तान

जब दास्ताँ मेरी रोज़-ए-हशर हो गई
टूटी फूटी मैं प्यारी ग़ज़ल हो गई

किस्से नादानियों के क्या सुनाएँगे साहिब
मैं ख़ुद ही से यूँ बेख़बर हो गई

नेकियों से ग़ैरों का घर सँवारकर
अपनी दुनिया ही को बदनज़र हो गई

करो दुआएँ अब मेरे लिए दोस्तों
दवाएँ सारी मेरी बेअसर हो गईं

राह मिलती नहीं न दिखती है मंज़िल
खोई खोई यहाँ इस क़दर हो गयी

लम्हा

याद है हर लम्हा बिताया साथ तेरे
ये तेरा दिल ही समझे है हालात मेरे
तेरी यादों के सिवा अपना कहने को
अब बचा ही क्या है सनम पास मेरे

Monday, 21 May 2018

इंतज़ार

इंतज़ार किसी का करता हूँ मैं खड़ा किनारे पर
नज़रें तिकी हैं मेरी तेरे उस एक नज़ारे पर
हो इजाज़त मुझे अगर तेरी ओ मेरे साक़ी
मैकदा घोल दूँ मय में मैं तेरे एक इशारे पर

क़ब्रगाह

क़ब्रगाह पर मेरी सभी को आशियाना मिला
थकी रूह को मेरी बस तेरा ठिकाना मिला
टूटकर बिखर गया होता मैं अदना सा कबका
ये ख़ुशनसीबी मेरी की मुझको तेरा सहारा मिला

बेनिशाँ

ऐ मशरूफ़ शख़्स तुझको अब परेशाँ न करेंगे
ख़ुदको तोड़कर हर तरफ़ा तेरे निगेहबाँ न बनेंगे
घोलकर ज़हर प्याले में एक तरफ़ा इश्क़ का
तेरे ग़म के सोहबत में यूँ ही बेनिशाँ न मरेंगे

Thursday, 17 May 2018

दिलबर

न तड़पा दिलबर को मोहब्बत रूठ जाएगी
न दिया अंजाम तो ये किस्मत रूठ जाएगी
ज़रा क़रीब आकर एक दफ़ा तो चूम लेने दे
मुझको आज़माने की ये फिदरत छूट जाएगी

तड़प

डबडबाते मेरे अश्कों में वो तड़प आज भी है
तुझतक जाए मेरे दिल में वो सड़क आज भी है
एक दफ़ा देख लूँ तुझको मेरी सूखी सी आँखों से
ख़त्म होती ज़िंदगी में वो ललक आज भी है

Wednesday, 16 May 2018

बेदख़ल

तू चाह कर भी मुझको भुला न पाएगा
साथ बिताया हर लम्हा तुझे याद आएगा
बेदख़ल दिल से तूने मुझको कर दिया लेकिन
मेरी वफ़ा की झूठी क़स्मे अब कैसे खाएगा

परछाईं

अच्छे लोगों की अब अक्सर अच्छाई से डरता हूँ
मैं हारी मोहब्बत की अपनी सच्चाई से डरता हूँ
गुम हो जाने दो मुझको ग़म के अंधेरों में लोगों
मैं उजालों में अब अपनी परछाईं से डरता हूँ

ज़हन

ये बात तो तेरे ज़हन ने भी कही होगी
तेरी ख़ातिर किसी ने यूँ तक़लीफ़ न सही होगी

इसी उम्मीद में तकता हूँ चाँद को मैं रातों में
कि तू भी उस ओर से इसे देख रही होगी

तेरी जुदाई में क्या हाल है तू ये पूछे न पूछे
मेरी दुआओं नें तो हालत मेरी कही होगी

तू चाह कर भी नफ़रत मुझसे कर न सकी
इतनी मोहब्बत तो तेरे दिल में भी रही होगी

बहोत आएँगे कदरदान मेरी ग़ज़लों के लेकिन
उनकी तारीफों में वो बात नहीं होगी

मयकशी

तेरी आँखों की मयकशी से थोड़ी फ़ुरसत दे दे
बिखरते जज़्बात संभल जाएँ इतनी रहमत कर दे
लौटूंगा दोबारा तेरे मैकदे में ओ मेरे साक़ी
लड़खड़ाते इस शराबी को थोड़ी मोहलत दे दे

Saturday, 12 May 2018

मुजरिम

अपने मुजरिम से ऐ सितमगर उसका हाल न पूछ
जिसका जवाब हो सिर्फ झूठ वो सवाल न पूछ
लुत्फ लेती रही ज़िंदगी के मौजों का हर रोज़
बिलखती रूह का अंधेरे में तुझको ख़याल न कुछ

सैर

तू सैर दुनिया की करता है
कोई तुझमें भटकता रहता है

ज़ाहिर तो है मंज़र-ए- वफ़ा
ये दिल है की बहकता रहता है

तेरे आँख देखकर मय मेरा
प्याले से छलकने लगता है

आती है जब दिल में याद तेरी
तू साँसों में खनकने लगता है

आँखों से छुआ था एक बार तुझे
अबतक ये महकता रहता है

Thursday, 10 May 2018

बदनाम

बदनाम हैं अगर तो बदनाम सही
तेरी मोहब्बत में मिला ये इनाम सही

आज़माती है तक़दीर हमें हर मोड़ पर
ज़िंदगी ही तो है कोई इम्तेहान नहीं

जज़्बात भी कोई अख़्तियार की चीज़ है ?
जुनून ही तो है बेलगाम सही

हसरत है बस तेरे उस एक नज़र की
चाहिए इश्क़ में दूसरा कोई मकाम नहीं

दोबारा देखकर तू मुझको चाहे आज़ाद न कर
हम तेरी नज़रों में बंधे कोई ग़ुलाम नहीं

उम्र

एक उम्र गुज़ार दी तुम्हारे इंतज़ार में
अब क्या जान लोगे इश्क़ के इज़हार में !
तुमसे हार कर भी हम तुम्हें जीत जाएँगे
शह और मात नहीं होती प्यार के व्यापार में

शोखियाँ

तेरी शोखियों का साहिब हिसाब नहीं मिलता
तेरी सूरत न हो ऐसा कोई ख़्वाब नहीं मिलता
तू राज़ है अनदेखा मेरी तिशनगी का
तेरी नज़रों का मुक़ाबिल कोई शराब नहीं मिलता

Sunday, 6 May 2018

ऐतबार

मेरे लफ़्ज़ों पर नहीं अगर तुझे ऐतबार
जलते पानी में तू अपने अक्स को निहार

वादियों की फ़िज़ा पर लिख़कर हैं भेजे मैंने
कुछ ज़ाहिर, कुछ कहे, कुछ अनकहे इक़रार

तेरी हसीं सदा तो है अब आशना मेरी
बजते किलकारियों से वो तेरी आँखों के सितार

एक अलग शख़्सियत है इस भीड़ में भी तेरी
जैसे उस झील की ख़ूबी वो चंचल चार चिनार

तेरे मेरे दरम्यान होंगे मौसम बहोत लेकिन
तेरा वजूद ही है मेरे सावन का श्रृंगार

Saturday, 5 May 2018

याद

तेरी यादों का लिए पुलिंदा बेक़रार बैठे हैं
एक अरसे से हम तेरे तलबगार बैठे हैं
सितम है सनम तेरा हमसे ख़फ़ा होना
तेरी चाहत में हम करके जाँनिसार बैठे हैं