इस क़दर ख़ुदको झील में निहारा न कर तेरी हसीं सदा से इश्क़ को पुकारा न कर पा ले दिलकश हुस्न घर के आईने में तू बेवजह चांद को फ़लक पे बुलाया न कर
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