बहुत लंबी है ज़िन्दगी ऐ दोस्त, कभी न कभी तुम भी ठोकर खाओगे, समझोगे हमारे ज़ख्मों की गहराइयों को जब ख़ुदको उन्हीं से घिरा पाओगे
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