अब क्या बात करें तुझसे, कहने को कोई बात नहीं
कुछ अनकही हैं बातें ज़रूर, लेकिन वो आज नहीं
आग़ाज़ मेरे ग़ज़लों का, मेरे शेर का अल्फ़ाज़ तुही
बिन तेरे ये कागज़ कोरे हैं, इन नज़्मों में जज़्बात नहीं
करलें खुलकर बात कई, बैठें कभी हम साथ कहीं
यूँ चैन नहीं तेरे दिल को, मेरी आँखों में भी रात नहीं
वो करें कैसी भी बात मेरी, मैं अच्छा सही मैं बुरा सही
मेरा सबकुछ है मालूम तुझे, हाँ तुझसे कोई राज़ नहीं
वो oreo तेरा देना मुझको, पर butter scotch मुझे रास नहीं
नहीं होगा कुछ वो याद तुझे, पर छोड़ो कोई बात नहीं