Friday, 1 June 2018

होंठ रसीले

आँखें नशीली किसी बहते शराब सी
होठ रसीले जैसे कली हो ग़ुलाब की
तेरे रुख़सार ने संजोए हैं राज़ बहोत खूब
है पहेली तू आला दर्जा बंद क़िताब सी

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