मेरी आँखों से लुढ़क कर अश्क़ तेरे दिल मे उतर जाए मेरी सिसकती पीर तेरी आहों में बिखर जाए नहीं था नसीब में कभी जो तेरी बाहों का सुकूँ है उम्मीद वो आराम मुझे मेरी मौत दे जाए
No comments:
Post a Comment