Friday, 1 June 2018

ख़्वाब

ख्वाबों में सजाई मूरत है तुझसी हूबहू
तिश्नगी आँखों की तू मेरे दिल की आरज़ू
बातें की कितनी तेरी यादों से मैंने
कह कुछ न पाया कभी तेरे रूबरू

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