सच्ची है शख़्सियत मेरी मैं बदमिज़ाज नहीं तुम्हारे इल्ज़ामों से मुझे कोई ऐतराज़ नहीं झुकता है फ़लक भी बंदे के एहतराम में आजकल ऐ ज़माने मैं तेरी सलामी का मोहताज नहीं
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