भूल बैठे वजूद खो गया है मकाम तेरी सादगी पे हम यूँ फना हो गए
मटकती तेरी वो बहकती सी आँखें उनकी आवारगी पे हम तो फ़िदा हो गए
ज़हर पाकर तेरी क़ातिलाना नज़र का प्याला अमृत का हम तो मना कर गए
जादू ऐसा है तेरा ओ मुझपर सदीक तुम मुझको बेहतर एक शायर बनाकर गए
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