आँखे मूंद कर मेरा नाम ले, रहना न होश में
अपने पाँव, मेरी कमर में लपेट कर
ताज महल अपने दोनो, मेरे सीने पे थोप दे
उसे नीलाब कर दे , अपनी ज़बाँ से लगा कर
मुझे खूब निचोड़, कर मेरा आब - नोश ले
उसे गले से उतारकर, होठों से चूम ले
फिर मेरे पॉप्सिकल को, अपनी आकृति में दबोच ले
आगे पीछे होने दे, मुझे ताज महल समेटने दे
तुझपे सवार हो जाऊँ, तू मेरी पीठ खरोच ले
अपने हाथों से अंदर रख ले, जो फिसल जाए 'निसार'
रह रह के आह भर मेरी जाँ, ज़ोर ज़ोर से खुरोश दे