दो दिन की है ज़िन्दगी सदा खुश रहना, दिल में हो कोई ग़म तो हमसे कहना, आएँ कितने ही तूफान इस दरिया-ए-ज़िन्दगी में ऐ दोस्त, बस सफीना-ए-रेहमत की तरह सदा बहते रहना।
No comments:
Post a Comment