तेरे रुख पे सजा ये जो ग़ुरूर है मेरे जुनूँ बिना सब फ़िज़ूल है तोड़ हद मैं सब बेहद हो जाऊँ तेरे इश्क़ का छाया ऐसा फ़ितूर है
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