संभल रहे हैं जज़्बात मेरे हर बार गिरते गिरते, मरना चाहता हूँ फिर मैं तेरे साथ जीते जीते, न कर देरी इज़हार-ए-मोहब्बत में ऐ बहार-ए-सीरत, कहीं मैं मर न जाऊँ तेरा इंतज़ार करते करते
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