है बस ये तमन्ना यही आरज़ू मेरी साँसो में की तू लग जा गले से समा जा मेरी बाहों में हर क़तरा बहा दूं लहू का मैं तेरे सजदे को मेरी ख़ातिर जो बहें अश्क़-ए-उल्फत तेरी आँखों से
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