Sunday, 19 August 2018

ख़बर

तूने देखा नहीं उस नज़र से मुझे
मैं सजाता रहा हर ग़ज़ल में तुझे
बुझती आँखें बहुत मुंतज़िर हैं मेरी
की तेरे आने की कोई ख़बर दे मुझे

Thursday, 16 August 2018

काश

मेरी आँखों को तेरे नज़ारे की प्यास है
गुज़री यादें ही मुझ बेचारे की आस है
रोने की मुझे कोई फुरसत नहीं सादिक़
अब मेरे दिल के हर इशारे में 'काश' है

लायक

हाँ ये माना की हमारे बीच कोई बाबत नहीं
पर तुझे भूल जाऊँ मैं ये मुझमें ताक़त नहीं
हो अगर मुमकिम तो बक्श दे राहत मुझे
मैं नादाँ ये भूल गया था की तेरे लायक नहीं

Wednesday, 1 August 2018

फ़र्ज़

एक दूजे की ओर फ़र्ज़ अपना निभाया हमनें
अपने नसीब को न जाने कितना सताया हमनें
वक़्त ने ख़ुशी के बख्शे मौके बहोत लेकिन
आख़िर एक दूसरे को ही कितना रुलाया हमनें