बेज़ार इश्क़ की बेबसी तू शबाब वो दिलनशीं तू
मौत को गिला ख़ुदा से मौत से भी हसीं तू
जगाए रात सारी आँखों को ज़िंदगी की वो बेकसी तू
वजूद का हिस्सा मेरे मेरी लकीरों में बसी तू
ग़ज़ल का अल्फ़ाज़ मेरे मेरे कलम की मसी तू
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