मेरे ख़यालों में ही सही काफ़ी है तेरा रहना
सर्द बेरहम रातों में हरारत है तेरी बाहों का गहना
रेल और सफर सा ये साथ अपना गवारा नहीं रूह को रूह से जुदाई सहना
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