मैं लफ्ज़ तू उर्दू की ज़बान की तरह
तू हज तू ही मेरे चारो धाम की तरह
मिट जाएँगी तेरी यादें भी साथ मेरे
पानी पर लिखे तेरे नाम की तरह
Thursday, 13 September 2018
तेरा नाम
उस्ताद और शागिर्द
स्वागत है आपका आपकी अंजुमन में
फ़र्ज़ के जुनूँ और ज्ञान के चमन में
एक पुरानी बात है सदियों से सही
उस्ताद की फ़तह है शागिर्द की लगन में
अंधेरों में चराग सा जलता रहे सदा
देता श्रम की आहुति बलिदान के हवन में
लेकर आशीष आपका हम साथ अपनें
कूँच कर रहे हैं बुलंदी के गगन में
हम, हमारा आज, और भविष्य भी
हैं सभी हाथ जोड़े गुरुओं के नमन में
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