पल दो पल के तारुफ़ को सोहबत समझ बैठे ख़िज़ाँ-ए-वफ़ा की शाम को तोहमत समझ बैठे मेरे नादान इश्क़ का अब गवाह बनेगा कौन ? मोहब्बत भरी बातों को हम मोहब्बत समझ बैठे
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