दिल की बात को दिल ही में रहना होगा
मेरा ग़म दुनिया को भी सहना होगा
मेरे जिस्म पर बनें घाव जो इश्क़ में तेरे
पाकीज़ा रूह का मेरी वही गहना होगा
अगर तू चाहे निकलना कभी दिल से मेरे
लहू को भी पानी सा बहना होगा
मोहब्बत का क़त्ल करके जाओगे कहाँ !
मेरा अफ़साना तुझे ज़माने से कहना होगा
न ढूंढ मेरे लफ़्ज़ों में मेरे ग़म की दास्ताँ
शायद शब्दों नें भी नक़ाब आज पहना होगा
No comments:
Post a Comment