जो तेरे दर से भी ठुकराया गया हो शब-ए-फ़ुरक़त में बहोत तड़पाया गया हो मुस्कुराता है बंदा दर्द से नज़रें मिलाकर जैसे बीते वक़्त में बेहद आज़माया गया हो
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