स्वागत है आपका आपकी अंजुमन में
फ़र्ज़ के जुनूँ और ज्ञान के चमन में
एक पुरानी बात है सदियों से सही
उस्ताद की फ़तह है शागिर्द की लगन में
अंधेरों में चराग सा जलता रहे सदा
देता श्रम की आहुति बलिदान के हवन में
लेकर आशीष आपका हम साथ अपनें
कूँच कर रहे हैं बुलंदी के गगन में
हम, हमारा आज, और भविष्य भी
हैं सभी हाथ जोड़े गुरुओं के नमन में
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