Thursday, 13 September 2018

उस्ताद और शागिर्द

स्वागत है आपका आपकी अंजुमन में
फ़र्ज़ के जुनूँ और ज्ञान के चमन में

एक पुरानी बात है सदियों से सही
उस्ताद की फ़तह है शागिर्द की लगन में

अंधेरों में चराग सा जलता रहे सदा
देता श्रम की आहुति बलिदान के हवन में

लेकर आशीष आपका हम साथ अपनें
कूँच कर रहे हैं बुलंदी के गगन में

हम, हमारा आज, और भविष्य भी
हैं सभी हाथ जोड़े गुरुओं के नमन में

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