तुम अच्छीं ज़माना अच्छा एक हम ही बुरे हैं तुम और तुम्हारा इश्क़ मुक़म्मल एक हम ही अधूरे हैं तुम्हारी सीरत के ख़ातिर ज़िंदा हैं ज़मीं पर हम हवस सूरत की होती तो जन्नत में भी हूरें हैं
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