रिस रिस कर बहे है लहू इश्क़ का सिसक सिसक कर कहे है लहू इश्क़ का दिल तोड़ती हैं बातें सनम की आज भी हर दफ़ा ये ग़म सहे है लहू इश्क़ का
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