सोना है, ज़ुल्म की आँच में निखर ही जाएगा आँखें भरी हैं, कहीं देर की तो बिखर ही जाएगा न रोको उसे जाने से मैख़ाने के बाहर लोगों किसीकी याद भुलाने को फिर इधर ही आएगा
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