मेरी आँखों को तेरे नज़ारे की प्यास है गुज़री यादें ही मुझ बेचारे की आस है रोने की मुझे कोई फुरसत नहीं सादिक़ अब मेरे दिल के हर इशारे में 'काश' है
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