कबतक मेरे दर्द पे मुस्कुराएँगे वो !
जी भर गया या और भी रुलाएँगे वो !
उनसे कह दो की वक़्त है मना लें मुझे
या मेरे जनाज़े पर आकर मनाएँगे वो !
मुझे मिली मोहलत अब ख़त्म हो रही है
क्या मुझसे मिलने का वादा निभाएँगे वो !
वादा किया है मौत के फ़रिशतों नें मुझसे
वहाँ मेरी मोहब्बत से मुझको मिलाएँगे वो ।
होंठ शायर के बिना उनके अब सूख रहे हैं
अपनी मौजूदगी से ग़ज़ल किसकी सजाएँगे वो !
ज़िंदा रहते तो न नसीब हुई हमदर्दी उनकी
शायद मेरी क़ब्र पर दो आँसू बहाएँगे वो ।
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