तेरी आँखें तेरे गेसू तेरी सीरत का पता देते हैं, आँचल ने तेरी मुस्कुराहट के राज़ कितने ही समेटे हैं, साड़ी ने तेरे गुल बदन को ढका है कुछ ऐसे, जैसे हिम शिखर शाम के गुलाबी बादलो में पनाह लेते हैं
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