तेरी आशिक़ी में कुछ ऐसा कर गए हम
के ज़माने ने पागल का ख़िताब दिया
किया करते तज इबादत ए ख़ुदा रोज़ लेकिन
तेरी चाहत ने हमें काफ़िर बना दिया
बहुत लंबी है ज़िन्दगी ऐ दोस्त,
कभी न कभी तुम भी ठोकर खाओगे,
समझोगे हमारे ज़ख्मों की गहराइयों को
जब ख़ुदको उन्हीं से घिरा पाओगे।
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