'वो' खुश है कहीं दूर पर वजह 'तुम' नहीं, आईने में ख्वाबों को भी 'तूने' सजाया कम नहीं; 'तुभी' अब ख़ाक डाल दे यादों की कब्र पर, चुभे जो टूटे काँच 'तुझे' तो 'वो' आसिम नहीं
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