ये बात तो तेरे ज़हन ने भी कही होगी
तेरी ख़ातिर किसी ने यूँ तक़लीफ़ न सही होगी
इसी उम्मीद में तकता हूँ चाँद को मैं रातों में
कि तू भी उस ओर से इसे देख रही होगी
तेरी जुदाई में क्या हाल है तू ये पूछे न पूछे
मेरी दुआओं नें तो हालत मेरी कही होगी
तू चाह कर भी नफ़रत मुझसे कर न सकी
इतनी मोहब्बत तो तेरे दिल में भी रही होगी
बहोत आएँगे कदरदान मेरी ग़ज़लों के लेकिन
उनकी तारीफों में वो बात नहीं होगी
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