तेरे बदन की लकीरों में अपनी हथेली को ढूंढते हैं बात वस्ल की आ जाये तो खुदा-ओ-जहाँ को भूलते हैं होती है मेरे दिल मे कसक तेरे बदन की कुछ ऐसी ख्वाबों में गीले से तेरे शबाब को चूमते हैं
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