Thursday, 31 May 2018

बदन

तेरे बदन की लकीरों में अपनी हथेली को ढूंढते हैं
बात वस्ल की आ जाये तो खुदा-ओ-जहाँ को भूलते हैं
होती है मेरे दिल मे कसक तेरे बदन की कुछ ऐसी
ख्वाबों में गीले से तेरे शबाब को चूमते हैं

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