दिल के बिखरे हुए हिस्सों की क़सम टूटे हुए उन पाक़ीज़ा रिश्तों की क़सम अश्क़ बेचकर ख़रीदी है शोहरत मैंनें महबूब न तो उसके किस्सों की क़सम
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