अपने मुजरिम से ऐ सितमगर उसका हाल न पूछ जिसका जवाब हो सिर्फ झूठ वो सवाल न पूछ लुत्फ लेती रही ज़िंदगी के मौजों का हर रोज़ बिलखती रूह का अंधेरे में तुझको ख़याल न कुछ
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