इंतज़ार किसी का करता हूँ मैं खड़ा किनारे पर नज़रें तिकी हैं मेरी तेरे उस एक नज़ारे पर हो इजाज़त मुझे अगर तेरी ओ मेरे साक़ी मैकदा घोल दूँ मय में मैं तेरे एक इशारे पर
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