इन आँखों ने देखें हैं नज़ारे वो
जो अछूते हैं धूप की नज़र से भी
हवस करती है बिखरते से इशारे वो
लहू दौड़ता है रगों की फ़ज़ल से भी
तपिश बढ़ाती हैं तेरी टूटती कराहें वो
मदहोश करता है तेरा दर्द से सिसकना भी
हर वीराना चीरती हैं तेरी आवाज़े वो
लुत्फ़ देता है तेरा रंज से सिमटना भी
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