अच्छे लोगों की अब अक्सर अच्छाई से डरता हूँ मैं हारी मोहब्बत की अपनी सच्चाई से डरता हूँ गुम हो जाने दो मुझको ग़म के अंधेरों में लोगों मैं उजालों में अब अपनी परछाईं से डरता हूँ
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