यूँ इतरा न ज़ालिम तू अपने हुस्नो शबाब पर
मेरे लफ़्ज़ों की नेमत ने तुझको मौला बना दिया
मेरे लफ़्ज़ों की नेमत ने तुझको मौला बना दिया
हार बैठे थे दिल अपना उसके मासूम नक़ाब पर
मौका पाते ही बेईमा ने असल रंग दिखा दिया
मौका पाते ही बेईमा ने असल रंग दिखा दिया
रखा था छुपाकर उसको ग़ज़ल की क़िताब में
नादानी में नादाँ नें अपना ही घर जला दिया
नादानी में नादाँ नें अपना ही घर जला दिया
लिखी कहानी अपनी तितली के परवाज़ पर
नाज़ुक से दिल को मेरे उसने बेजा ही रुला दिया
नाज़ुक से दिल को मेरे उसने बेजा ही रुला दिया
ओ ख़ुदा मोहब्बत के मेरा कुछ तो हिसाब कर
उसने बरसों के रिश्ते को एक पल में मिटा दिया
उसने बरसों के रिश्ते को एक पल में मिटा दिया
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