एक उम्र गुज़ार दी तुम्हारे इंतज़ार में अब क्या जान लोगे इश्क़ के इज़हार में ! तुमसे हार कर भी हम तुम्हें जीत जाएँगे शह और मात नहीं होती प्यार के व्यापार में
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