Monday, 5 February 2024

हाल

हाल क्या है बाद मिलने के, तुझसे क्या बताएँ

तेरे ज़ुल्मों की फ़हरिस्त, कैसे तुझे दिखाएँ


चाँद सितारे और आसमाँ, थे कर रहे चर्चा तेरा

हमारी आपसी बात, भला हम तुझे क्यों बताएँ


रेशमी गेसू, मू-कमर, प्यासे होंठ, और उसपर

तेरी नफ़्स-परस्त बदन में हैं, जाने कैसी कैसी बलाएँ


मह-वश चहरा, नागिन-बाहें, सुराही-गर्दन और

परी-पैकर पर लहराती, तेरी साए सी घटाएँ


काकुले चहरे पे बिखरा के, देखती हो ऐसे

जी चाहता है पास बुलाकर, सारी रात जगाएँ


शमा जला जला के, तू बुझाती है मेरी जाँ

जब भी झपकती हैं, तेरी तेग़ सी तीख़ी निगाहें 


तुझे यूँ छुएँ की तू, मुझपे 'निसार' हो जाए

कुछ ऐसा करें कि, हर बार तुझे तुझसे ही चुराएँ

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