न कह सको अगर, तो किनाया करो
पर ज़हन में, मुसलसल बसाया करो
साथ तुम्हारे, एक उम्र बितानी है मुझे
इस धूप में, अपनी ज़ुल्फ़ों का साया करो
तोड़ दो मुझे, अपनी बाहों में समेटकर
फ़िर उन्हीं हाथों से, मुझे बनाया करो
भौंह साग़र, और आँखें शराब हैं तुम्हारी
उसी झील में, मुझे तुम डुबाया करो
तुम कहती हो, तुम्हे है मोहब्बत मुझसे
हर ज़बान में, हर पहर ये जताया करो
तुम्हारे लफ्ज़ और साँसों में मोहब्बत भरी है
मुझे, मोहब्बत भरे लहज़े में बुलाया करो
मेरी सखी,मेरी संगिनी, मेरी सहचरी हो तुम
हर रूप में, मुझे ख़ुदसे मिलाया करो
मेरे साथ बंधकर भी, तुम आज़ाद ही रहो
अपनी ख़्वाहिशें, मुझे तुम बताया करो
तुम्हें पलकों पे, अपनी बिठाएँगे हम
खुदको अपनी ही धुन पे, नचाया करो
सर पर हाथ रख, अपने सीने से लगा लो
कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनी सुनाया करो
मुश्किलें आसाँ सी हो जाएँगी, संग तुम्हारे
हाथ थाम कर मेरा, पानी पर चलाया करो
तुम्हें सारे ऐबों के साथ, चाहता है 'निसार'
अपनी नादानियों से मुझे, सताया करो
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